इटियाथोक क्षेत्र में चल रहे क्लीनिक पर हुई छापेमारी तीन को मिली प्रतिकूल प्रविष्टि

गोंडा
बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इटियाथोक में तीन अवैध अस्पतालों की पड़ताल की है।स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखकर संचालक व चिकित्सक मरीजों को छोड़कर खिसक लिए।सीएमओ डॉ आदित्य वर्मा व अधीक्षक सुनील कुमार पासवान के साथ स्वास्थ्य कर्मी इटियाथोक के बलरामपुर मार्ग पर संचालित रानी मेमोरियल हास्पिटल एवं जच्चा बच्चा केंद्र पर जांच पड़ताल के लिए पहुंचे।यहां मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था।तभी टीम को देखकर अस्पताल के कर्मचारी व चिकित्सक को छोड़कर भाग निकले।इसके बाद टीम बाबागंज मार्ग पर चल रहे संजीवनी औषधालय व रूद्र पाली क्लीनिक के बारे में जानकारी लेने के लिए पहुंची।यहां भी लोग धीरे से खिसक लिए।अधीक्षक सुनील कुमार पासवान ने बताया कि अस्पताल संचालित किए जाने की सूचना मिली थी।अस्पताल संचालकों से कागजात उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में अवैध क्लिनिक झोलाछाप डॉक्टर व बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं अधिकतर मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के हैं जो लाइसेंस के हैं भी वह भी मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं और उन पर फार्मासिस्ट भी नहीं बैठते हैं स्वास्थ्य विभाग को यह सब दिखाई नहीं देता है केवल खाना पूर्ति के लिए कभी कभार छापेमारी का दिखावा करते हैं जिसकी एक बानगी आज इटियाथोक में भी देखने को मिली विडंबना इस बात की है कि जब क्लीनिक मेडिकल स्टोर नर्सिंग होम पैथोलॉजी या किसी भी प्रकार की प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है तो फिर बिना लाइसेंस के क्षेत्र में कैसे संचालित हो रहा है इस पर किसकी मेहरबानी है शासन व प्रशासन आम जनमानस के स्वास्थ्य की प्रति जागरूक नहीं है कहीं ना कहीं शासन व प्रशासन के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपकेंद्र व जिला स्तर पर संचालित अस्पताल जिम्मेदार है यदि वहां अच्छी सेवाएं मिले अच्छी दवाई मिले लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिले तो तो प्राइवेट क्लीनिक व अवैध क्लिनिक संचालित नहीं हो पाएंगे लेकिन यदि अवैध तरीके से क्लिनिक संचालित नहीं होंगे तो सरकारी महकमा की कमाई कैसे होगी एक तरफ योगी सरकार आम जनमानस को स्वास्थ्य लाभ दिलाने के लिए लाखों करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है उसके बावजूद लोगों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलता है जिसके कारण वह झोलाछाप डॉक्टर अवैध तरीके से चलने वाले क्लीनिक के मकड़ जाल में फंस जाते हैं और अपना पैसा और अपना जीवन दोनों दांव पर लगाते हैं। शासन व प्रशासन आम जनमानस को स्वास्थ्य लाभ दिलाना चाहते हैं सरकारी महकमा को अपने में सुधार लाना होगा वही बिना लाइसेंस के व मानको पर खरा ना उतरने वाले किसी भी प्रकार के क्लीनिक के संचालन पर पूरी तरीके से रोक लगानी होगी।

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